उत्तर प्रदेशबाँदा

न सिर पर छत, न पेट में दाना… बारिश ने छीना आशियाना! DM से गुहार लगाने पहुंचे ग्रामीण

बांदा में लगातार बारिश से जरर गांव के कई कच्चे मकान गिर गए। करीब 50 ग्रामीण छत और भोजन की मांग लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, राहत में देरी का आरोप लगाया।

Banda News: उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार बारिश ने गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लंबे समय से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त होकर गिर गए। घर ढहने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो गई है। सोमवार को नरैनी तहसील के ग्राम जरर से करीब 50 ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रशासन से सिर छिपाने के लिए सुरक्षित जगह और भोजन उपलब्ध कराने की मांग की।

खुले में रात काटने को मजबूर

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से रुक-रुककर हो रही बारिश ने उनके कच्चे घरों को कमजोर कर दिया। कई मकान बारिश का दबाव नहीं झेल सके और ढह गए। घर गिरने के बाद परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित रखने की है। ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ परिवार रात दरवाजे या खुले स्थान पर गुजारने को मजबूर हैं। घर का सामान खराब होने से बचाने के लिए उसे आसपास के दूसरे गांवों में रहने वाले लोगों के घरों में रखा गया है। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि उनके पास न रहने के लिए पक्की छत है और न ही पर्याप्त भोजन की व्यवस्था। इसी परेशानी को लेकर वे जिलाधिकारी से मदद की उम्मीद में कलेक्ट्रेट पहुंचे।

सरकारी आदेश के बावजूद राहत का इंतजार

ग्रामीणों ने प्रशासनिक स्तर पर राहत मिलने में देरी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से बारिश और आपदा से हुए नुकसान की भरपाई जल्द कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका लाभ उन्हें समय पर नहीं मिल रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लेखपाल और संबंधित अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन और राहत की प्रक्रिया में लापरवाही बरती जा रही है। इसी वजह से प्रभावित परिवार लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

अब राहत का इंतजार

नरैनी तहसील के जरर गांव से आए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के सामने अपनी स्थिति रखी और जल्द राहत दिलाने की मांग की। उनका कहना है कि बारिश के बीच खुले में रहना परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। अब सवाल यह है कि प्रशासन इन परिवारों को कब तक अस्थायी आश्रय, भोजन और क्षतिग्रस्त मकानों से जुड़ी राहत उपलब्ध कराता है। बारिश के बीच बेघर हुए ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

रिपोर्ट- अभिषेक शुक्ला

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